वक्फ और इस्लामी मामलों के मंत्रालय ने दो जीसीसी-स्तरीय समिति बैठकों में भाग लिया
दोहा, 04 अगस्त (QNA) - वक्फ और इस्लामी मामलों के मंत्रालय ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित दो गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल (GCC) स्तर की समिति बैठकों में भाग लिया।
ये थीं जीसीसी देशों में इस्लामी मामलों और वक्फ के विशेषज्ञों की स्थायी समिति की 43वीं बैठक, और इस्लाम की सच्ची छवि प्रस्तुत करने तथा नफरत, असहिष्णुता, कट्टरता और सांप्रदायिकता के अभियानों का सामना करने के लिए गठित समिति की 14वीं बैठक।
बैठकों में जीसीसी सदस्य देशों के मंत्रालयों और इस्लामी मामलों व वक्फ के लिए समर्पित संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
इस्लामी मामलों विभाग के निदेशक मोहम्मद जबर अल मन्नाई ने दोनों बैठकों में वक्फ और इस्लामी मामलों के मंत्रालय के प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया, जिसमें मंत्रालय की इस्लामी संबंध इकाई के प्रमुख माजिद अल मंसूरी भी शामिल थे।
ये बैठकें जीसीसी सहयोग को मजबूत करने, विशेषज्ञता का आदान-प्रदान करने और इस्लामी व वक्फ कार्य को आगे बढ़ाने के लिए पहल विकसित करने के ongoing प्रयासों के तहत आयोजित की गईं, साथ ही उदारता और सहिष्णुता को बढ़ावा देने के लिए।
स्थायी समिति की 43वीं बैठक में वक्फ क्षेत्र को सशक्त करने और समुदाय विकास में उसकी भूमिका को मजबूत करने के लिए कई प्रस्तावों और पहलों पर चर्चा की गई।
इनमें प्रमुख प्रस्ताव था एक राष्ट्रीय सूचकांक स्थापित करने का, जो वक्फ के सामाजिक प्रभाव को मापने के लिए मात्रात्मक और गुणात्मक संकेतकों का विकास करेगा, ताकि वक्फ संस्थाओं के प्रभाव और उनके आर्थिक व सामाजिक विकास में योगदान का आकलन किया जा सके।
इस प्रस्ताव का उद्देश्य वक्फ क्षेत्र में पारदर्शिता और शासन को बढ़ाना और निर्णयकर्ताओं को सटीक डेटा और मापने योग्य, तुलनीय संकेतक प्रदान करना भी था।
प्रतिभागियों ने सूचकांक, उसकी कार्यप्रणाली और कार्यान्वयन तंत्र पर सदस्य देशों के प्रस्तावों और दृष्टिकोणों की समीक्षा की।
इसका उद्देश्य वक्फ के प्रभाव को मापने के लिए एकीकृत जीसीसी ढांचा स्थापित करना, वक्फ संसाधनों का अधिकतम लाभ उठाना, सतत विकास लक्ष्यों की प्राप्ति में वक्फ के योगदान को मजबूत करना और जीसीसी देशों में विकास का समर्थन करना है।
प्रतिभागियों ने इस्लामी प्रचार, धार्मिक मार्गदर्शन, जन जागरूकता, मस्जिद प्रशासन और सामुदायिक कार्यक्रमों के क्षेत्रों में सदस्य देशों के सफल अनुभवों का लाभ उठाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया, ताकि सेवा की गुणवत्ता में सुधार हो और खाड़ी क्षेत्र में सफल प्रथाओं का आदान-प्रदान हो सके।
बैठक में संयुक्त सांस्कृतिक पहलों के विकास की संभावनाओं का भी अन्वेषण किया गया, ताकि इस्लामी सभ्यता के संवाद को बढ़ावा दिया जा सके और संवाद, सहिष्णुता और खुलेपन को बढ़ाने में इस्लामी सभ्यता के योगदान को उजागर किया जा सके।
प्रतिभागियों ने पिछले बैठकों के निर्णयों और सिफारिशों के कार्यान्वयन में हुई प्रगति की भी समीक्षा की, जिससे संयुक्त परियोजनाओं की स्थिरता, संस्थागत प्रदर्शन में सुधार और विशेषज्ञता व ज्ञान का आदान-प्रदान बढ़ाया जा सके।
वहीं, कार्य समिति की 14वीं बैठक में बौद्धिक और मीडिया निगरानी से संबंधित कई केस स्टडीज का परीक्षण किया गया।
प्रतिभागियों ने गलत सूचना अभियानों और नफरत भरे भाषण का सामना करने के लिए संयुक्त खाड़ी कार्रवाई को मजबूत करने हेतु विशेष शैक्षणिक संस्थानों और अनुसंधान केंद्रों के साथ काम करने पर विचार किया।
उन्होंने मीडिया आउटलेट्स और डिजिटल प्लेटफार्मों पर इस्लाम को बदनाम करने, नफरत भरे भाषण और कट्टरपंथी विचारों की निगरानी के लिए एक खाड़ी वैज्ञानिक वेधशाला स्थापित करने के संबंध में जीसीसी महासचिवालय के ज्ञापन पर भी चर्चा की।
ज्ञापन का उद्देश्य समकालीन चुनौतियों का प्रभावी ढंग से जवाब देने के लिए निगरानी और विश्लेषण उपकरणों के विकास में अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय अनुभवों का लाभ उठाना है।
दोनों बैठकों में जीसीसी सदस्य देशों द्वारा इस्लामी मामलों, वक्फ और बौद्धिक सुरक्षा के क्षेत्रों में समन्वय और सहयोग जारी रखने के महत्व की पुष्टि की गई।
प्रतिभागियों ने वक्फ आधारित विकास को बढ़ावा देने, इस्लाम की सच्ची छवि को प्रतिबिंबित करने और नफरत भरे भाषण व कट्टरता का मुकाबला करने के लिए संयुक्त पहलों और परियोजनाओं को और विकसित करने की आवश्यकता पर जोर दिया, ताकि समकालीन विकास के अनुरूप और खाड़ी क्षेत्र के एकीकरण को समर्थन मिल सके। (QNA)
यह सामग्री कृत्रिम बुद्धिमत्ता द्वारा अनुवादित की गई है।
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