यूनिसेफ ने एआई गवर्नेंस नीतियों में बच्चों के अधिकारों को केंद्र में रखने की मांग की
जिनेवा, 01 जुलाई (क्यू एन ए) - संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (यूनिसेफ) ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता गवर्नेंस नीतियों में बच्चों के अधिकारों को सबसे आगे रखने की मांग की है।
बुधवार को जारी एक बयान में, संगठन ने चेतावनी दी कि पूरी एक पीढ़ी "विस्तृत वैश्विक प्रयोग" का हिस्सा बन गई है, क्योंकि बच्चों द्वारा इन तकनीकों का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है, और प्रमाण स्पष्ट रूप से दिखाते हैं कि बच्चे इन उपकरणों को कितनी तेजी से अपना रहे हैं और इनका प्रभाव कितना व्यापक है।
बच्चे एआई सिस्टम के लिए सबसे संवेदनशील समूह हैं और उन्हें इसके परिणामों के साथ पूरी जिंदगी जीना पड़ेगा, हालांकि अधिकांश एआई गवर्नेंस नीतियाँ अभी भी बच्चों को अपनी प्राथमिकताओं के केंद्र में नहीं रखती हैं, बयान में कहा गया।
इसमें बच्चों की वृद्धि और भलाई पर एआई के प्रभाव, विशेष रूप से इसके जोखिमों पर अनुसंधान में निवेश बढ़ाने की मांग की गई, और एआई से उत्पन्न शोषणकारी प्रथाओं को रोकने के लिए कड़े कानून, गवर्नेंस फ्रेमवर्क और कॉर्पोरेट जवाबदेही की अपील की गई।
बयान में यह भी जोर दिया गया कि सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि एआई सिस्टम को उच्चतम सुरक्षा और पारदर्शिता मानकों के साथ डिजाइन किया जाए, साथ ही एआई के प्रति जागरूकता को मजबूत किया जाए, और बच्चों व उनके देखभालकर्ताओं को डिजिटल वातावरण में आगे बढ़ने के लिए समर्थन प्रदान किया जाए।
यह अपील एआई गवर्नेंस पर पहली बार वैश्विक संवाद से पहले आई है, जो 6-7 जुलाई को जिनेवा में आयोजित होने वाला है।
यूनिसेफ द्वारा 10 देशों के अद्यतन आंकड़ों के आधार पर किए गए विश्लेषण के अनुसार, कम से कम 20 मिलियन बच्चे अब एआई का उपयोग कर रहे हैं, और वे वयस्कों की तुलना में तीन गुना अधिक तेजी से इस तकनीक को अपना रहे हैं। (क्यू एन ए)
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